संसार में दो प्रकार की विद्याएँ हैं जो जानने योग्य हैं |एक अपरा विद्या और दूसरी परा विद्या हैं |अपरा विद्या में चारों वेद, छः शास्त्र आदि समस्त भौतिक विद्याएँ आ जाती हैं | इस अपरा विद्या से भी हमें अद्भुत सांसारिक ज्ञान-विज्ञान प्राप्त होता है | क्योंकि इसमें अनुभव है, सिद्धान्त है | अनुभव द्रष्टा ॠषियों ने इसे पाया है अन्तर्तम में और उसे ही लिपिबद्ध कर दिया है |वह जो ज्ञान है गुरु-शिष्य परम्परा से प्राप्त होता है, जो बड़ी ही पवित्र और पावन परम्परा है |
-संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज
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