कैसी भी स्थिति आने पर अन्त:करण में क्षोभ या विषाद को न आने देना, मुनियों के समान मन को संयमित रखकर कार्यों को करना, दुर्व्यवहार न करना, विहंगम योग की प्राथमिक साधना द्वारा मन को नियंत्रित करना, अन्तर्मुखी करना मानसिक तप है |
-संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज

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