नित्य प्रात:काल की धारणा आन्तरिक शन्ति का मार्ग प्रशस्त करती है | समस्त मनोविकारों से हमारी कार्य-क्षमता बढ़ जाती है | धारणा, ध्यान मात्र उन लोगों के लिए ही नहीं है, जो जीवन से विरत हैं, और चले गये हैं, हिमालय में, बल्कि यह सम्पूर्ण विश्व की मानवता के लिए समान रुप से लाभकारी है |
-संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज

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