सदाचार से, सद् व्यवहार से, सद् भक्ति से, जीव क्या करता है-परम सत्यस्वरुप उस विभु आत्मा के सामीप्य में आता है | जिसका जीवन जितना ही सत्यमय होगा, जो जितना ही कोमल होगा, जो जितना ही छल-कपट और विसंगतियों से दूर होगा, जिसका हृदय जितना ही स्वच्छ होगा, वह उतनी ही प्रभु-प्राप्ति की पात्रता को प्राप्त करेगा |
-संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज

No comments:
Post a Comment